भक्त माल कथा माला || 27 || भोला भगत
"भोला भगत" एक गाँव के बाहर छोटा सा शिव मन्दिर था, जिसमें एक वृद्ध पुजारी रहते थे। एक दिन एक गरीब माँ अपने नन्हे से बालक को मन्दिर के द्वार पर छोड़कर चली गई। बहुत खोजने पर भी पुजारीजी को बालक के परिवार का कुछ भी पता न चला। जब गाँव का भी कोई व्यक्ति उस बालक का लालन-पालन करने को तैयार न हुआ तो पुजारीजी ने भगवान् शिव की इच्छा समझकर उसे अपने पास रख लिया और उसका नाम भोला रख दिया। गाँव के श्रद्धालु भक्तों से जो कुछ प्राप्त होता, उसी से भगवान् शिव का, पुजारीजी का और बालक भोला का किसी तरह गुजारा चलता। यदि किसी दिन कम भी पड़ता तो पुजारीजी बालक और भगवान् को भोग लगाकर स्वयं गंगाजल पीकर रह जाते। धीरे-धीरे भोला बड़ा होने लगा और अब वह पुजारीजी के कामों में हाथ बँटाने लगा। वृद्ध पुजारीजी के थके-हारे हाथों को कुछ आराम मिलने लगा, इसलिए उन्होंने भोला को मन्दिर की सफाई, भगवान् शिव की पूजा, उनको भोग लगाने और उनकी आरती करने की विधि अच्छी प्रकार समझा दी। अब वे स्वयं भगवान् शिव क...