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Showing posts from March, 2025

भक्त माल कथा माला || 27 || भोला भगत

"भोला भगत"          एक गाँव के बाहर छोटा सा शिव मन्दिर था, जिसमें एक वृद्ध पुजारी रहते थे। एक दिन एक गरीब माँ अपने नन्हे से बालक को मन्दिर के द्वार पर छोड़कर चली गई। बहुत खोजने पर भी पुजारीजी को बालक के परिवार का कुछ भी पता न चला।          जब गाँव का भी कोई व्यक्ति उस बालक का लालन-पालन करने को तैयार न हुआ तो पुजारीजी ने भगवान् शिव की इच्छा समझकर उसे अपने पास रख लिया और उसका नाम भोला रख दिया।          गाँव के श्रद्धालु भक्तों से जो कुछ प्राप्त होता, उसी से भगवान् शिव का, पुजारीजी का और बालक भोला का किसी तरह गुजारा चलता। यदि किसी दिन कम भी पड़ता तो पुजारीजी बालक और भगवान् को भोग लगाकर स्वयं गंगाजल पीकर रह जाते।          धीरे-धीरे भोला बड़ा होने लगा और अब वह पुजारीजी के कामों में हाथ बँटाने लगा। वृद्ध पुजारीजी के थके-हारे हाथों को कुछ आराम मिलने लगा, इसलिए उन्होंने भोला को मन्दिर की सफाई, भगवान् शिव की पूजा, उनको भोग लगाने और उनकी आरती करने की विधि अच्छी प्रकार समझा दी। अब वे स्वयं भगवान् शिव क...
 (55) श्री त्रिपुर दास जी का पावन चरित्र, अगर आपके जीवन में अपार कष्ट हैं तो यह चरित्र सुनें ! Bhajan Marg - YouTube https://www.youtube.com/watch?v=_I0pW7JpMFk Transcript: (00:00) एक महा भागवत परम पावन श्री त्रिपुर दास जी महाराज अगर दुख मुझे घेरे हैं मेरे प्यारे राजी हैं तो मुझे दुख से कोई परेशानी नहीं यह प्रेमी का हृदय देखो त्रिपुर दास जी महाराज कायस्थ कुल में प्रकट हुए काय पुर दास भक्ति सुखरास भरयो करो ऐ सोपन सीत दगला पठाई निपट अमोल पट हिए हित जट आवे ताते अति भावे नाथ अंग पहरा आयो को काल नरपति ने बिहाल कियो भयो इस ख्याल ने को घर में खाइए वही ऋतु आई सुधि आई आंख पानी भरी आई एक दवात दी आई (01:10) बेच लाइए श्री त्रिपुर दास जी कायस्थ कुल में प्रकट हुए थे बड़ा हिम्मत बनाने वाला ये चरित्र है ब्रजमंडल में शेरगढ़ है वहां इनका जन्म हुआ था वहां के निवासी थे और आपके पिता राजमंत्री थे बचपन से ही भगवत भक्ति के संस्कार थे जिनमें कुछ दिव्य प्रकाश होता है व बचपन से भगवत भक्ति का जिनको यह लगता है कि जवानी में विषय भोग ले और बुढ़ापे में भजन करेंगे तो भूल जाए बुढ़ापे में मन को प्रभु में नहीं लगाया ...

भक्त माल कथा माला || 26 || भक्त अढ़ैया जी का हास्यप्रद प्रसंग

भक्त माल कथा माला || 26 || भक्त अढ़ैया जी का हास्यप्रद प्रसंग जो उपासक अनन्य चित्त से मेरा स्मरण करता है मैं उसके लिए सहज हो जाता हूं सहज प्राप्त हो जाता हूं। जिनको लगता है भगवत प्राप्ति बहुत कठिन है अरे तो कहीं ब्रह्म ऋषियों को मिलते हैं नहीं ये इतने कृपालु है कि बिल्कुल सहज है जो सहज हो जाए तो बहुत जल्दी मिल जाए कहीं गाय चराने वाले को मिल जाते हैं कहीं एकदम भोले भाले जिनको ज्ञान नहीं है उनको भी मिल जाते हैं।  एक बहुत ही भोला नव युवक था अड़ैया नाम था उसका अढ़ाई कहते हैं ढाई किलो को पहला आहार उसका ढाई किलो का ही है आगे आप श्रद्धा रखें तो और प्लस हो सकता है लेकिन वो मतलब घर में माता-पिता पधार गए तो उसे कोई ढाई किलो आटे की कौन रोटी बना के दे थोड़ा जब उसके अंदर चेतना जागृत हुई तो जब कहीं ठोर नहीं मिलती तो संतो का आश्रम मिलता है । एक आश्रम में गए उन्होंने कहा हमको नौकरी में रख लो कोई सेवा में रख लो तुम्हारा नाम क्या है बोले अड़ैया कोई नाम है बोले गांव के लोग कते कक ढाई किलो हम पाते हैं तो ढाई किलो बोले तौल के ढाई किलो आटे का जब हम रोटी पाते हैं तब हमारी बाल भोग होता है आगे कोई श्रद्धा क...

भक्त माल कथा माला || 25 || भक्त रामदास जी की अनसुनी कहानी

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 भक्त माल कथा माला ||  25 ||  भक्त रामदास जी की अनसुनी कहानी  बड़ा सुंदर प्रसंग है इनका नाम है भक्त रामदास जी और ये दक्षिण में गोदावरी के किनारे कनकावती नाम की नगरी थी वहां ये रामदास जी रहते थे। यह चतुर्वर्ण के कुल के थे और यह अपने कुल परंपरा के अनुसार जो गृहस्थी की सेवा है वही सेवा करते थे अत्यंत दैन्य और अत्यंत गरीब सीधे-साधे, पूरे शरीर में ठीक से पहनने के लिए वस्त्र भी नहीं थे। खाने के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं थी अगर आज वे सेवा ना करें जो उनके कुल की है तो दूसरे दिन उनके यहां रसोई नहीं जलेगी। ऐसी कोई अन्न की भी व्यवस्था नहीं थी रोज का रोज कमाना और अपने परिवार का भरण पोषण करना आए हुए अतिथि की सेवा करना और सत्संग से बड़ा प्यार था उनको यह दंपति एक मात्र केवल भगवत आश्रित कोई संपत्ति नहीं किसी भी तरह का किसी से कोई व्यवहार नहीं क्योंकि व्यवहार लोग धनी मानी से करते हैं। गरीब अकिंचन से नहीं करते हैं। इनके एक लड़का था और यह सदैव अपने कुल की जो सेवा है वो जूता गांठने की वो बीच बाजार में जाकर बैठते किसी के फटे पुराने जो पादुका है उसको सिलते या कहीं ऐसा संयोग बन...