भक्त माल कथा माला || 17 || केले की मार्मिक कथा
केले के फल की कथा आपको मालूम है कि यह केले का पेड़ कौन है? माघ के मास में लोग इसका पूजन करते हैं। इसके पत्तों के बंदनवार लगाते हैं। शुभ कार्य में और सत्यनारायण भगवान की पूजा में केले के पत्ते लगाए जाते हैं और बृहस्पतिवार को केले का पूजन होता है? क्यों? शायद आप नहीं जानते हैं चलिए हम ही बता देते हैं कि केले के वृक्ष की कथा दुर्वासा ऋषि से जुड़ी हुई है। कौन है यह दुर्वासा ऋषि ? आप सभी जानते होंगे कि ये वे ऋषि हैं जिनके श्राप से देव, यक्ष, नाग, किन्नर, दानव, मानव आदि सभी डरते थे। कैसे हुआ ऋषि दुर्वासा का जन्म भगवान शिव के अवतार होने के कारण ऋषि दुर्वासा के स्वभाव में भी जन्म से ही क्रोध का ज्वालामुखी समाहित था। दुर्वासा ऋषि को छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आ जाता था और वे श्राप दे देते थे। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय माता पार्वती, भगवान शिव के साथ एकाकी समय व्यतीत कर रहीं थीं । तभी अचानक से देवताओं ने उनके एकांतवास में खलल डाल दिया। उनके इस दुषकार्य के श बाद भगवान शिव का क्रोध अपने चरम पर पहुंच गया। भगवान शिव का क्रोध देख सभी देवता छुप गए। इतने में माता अनुसूया भ...