भक्त माल कथा माला || 21 || कौशिक ब्राह्मण व निष्ठापूर्वक कर्म
भक्त माल कथा माला || 21 || कौशिक ब्राह्मण व निष्ठापूर्वक कर्म * कौशिक नामक एक ब्राह्मण बड़ा तपस्वी था । तप के प्रभाव से उसमें बहुत आत्म बल आ गया था । एक दिन वह वृक्ष के नीचे बैठा हुआ था कि ऊपर बैठी हुई चिड़िया ने उस पर बीट कर दी । कौशिक को क्रोध आ गया । लाल नेत्र करके ऊपर को देखा तो उसके तेज के प्रभाव से चिड़िया जलकर नीचे गिर पड़ी । ब्राह्मणको अपने बलपर गर्व हो गया । दूसरे दिन वह एक सद्गृहस्थके यहाँ भिक्षा माँगने गया । गृहस्वामिनी पतिको भोजन परोसनेमें लगी थी । उसने कहा- भगवन्! थोड़ी देर ठहरो अभी आपको भिक्षा दूँगी । ”इस पर ब्राह्मणको क्रोध आया कि मुझ जैसे तपस्वीकी उपेक्षा करके यह पति-सेवाको अधिक महत्व दे रही है। गृहस्वामिनीने दिव्य दृष्टिसे सब बात जान ली । उसने ब्राह्मणसे कहा- “आप क्रोध न कीजिए मैं कोई जंगलकी चिड़िया नहीं हूँ । अपना नियत-कर्तव्य पूरा करनेपर आपकी सेवा करूंगी । ”ब्राह्मण क्रोध करना तो भूल गया, उसे यह आश्चर्य हुआ कि चिड़िया वाली बात इसे कैसे मालूम हुई ? ब्राह्मणी ने इसे पति सेवाका फल बताया और कहा कि इस सम्बन्धमें अधिक जानना हो तो मिथिलापुरी में तुलाधार वैश्यक...