भक्त माल कथा माला || 20 || जगन्नाथ दास महाराज
भक्तजनों राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण। श्री साम्ब सदाशिवाय नमः। आज की कहानी का शीर्षक है जगन्नाथ दास जी महाराज जैसा ही की नाम से ही पता चलता है जगन्नाथ जी के सवक और आज उनके जीवन के अंतिम समय की एक घटना हम आपको सुनाने जा रहे हैं। जगन्नाथ दास महाराज एक संत थे जिनका नाम था जगन्नाथ दास महाराज। वे भगवान को प्रीतिपूर्वक भजते थे। वे जब वृद्ध हुए तो थोड़े बीमार पड़ने लगे। उनके मकान की ऊपरी मंजिल पर वे स्वयं और नीचे उनके शिष्य रहते थे। वृद्धावस्था के कारण उन्हें चलने फिरने में कठिनाई होती थी, कभी कभार रात को एक-दो बार बाबा को दस्त लग जाते थे, इसलिए "खट-खट" की आवाज करते तो कोई न कोई शिष्य आ जाता और उनका हाथ पकड़कर उन्हें शौचालय ले जाता। बाबा की सेवा करने वाले वे शिष्य जवान लड़के थे। एक रात बाबा ने खट-खटाया तो कोई आया नही। बाबा ने कई बार खटखटाया, फिर भी कोई नहीं आया। बाबा बोले- "अरे, कोई आया नही ! बुढापा आ गया, प्रभु !" इतने में एक युवक आया और बोला "बाबा ! आईए मैं आपकी सहायता करता हूं।" बाबा का हाथ पकड़कर वह उन्हें शौचालय मैं ले गया। फिर उसने उनके हाथ-पैर धुलाकर उनक...