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Showing posts from March, 2026

भक्त माल कथा माला || 28 || श्रीराँका-बाँकाजी

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श्रीराँका-बाँकाजी पण्ढरपूरमें लक्ष्मीदत्त नामके एक ऋग्वेदी ब्राह्मण रहते थे। ये सन्तोंकी बडे प्रेमसे सेवा किया करते थे। एक बार इनके यहाँ साक्षात् नारायण सन्तरूपसे पधारे और आशीर्वाद दे गये कि तुम्हारे यहाँ एक परम विरक्त भगवद्भक्त पुत्र होगा। इसके अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल द्वितीया गुरुवार संवत् 1347 वि० को धनलग्नमें इनकी पत्नी रूपादेवीने पुत्र प्राप्त किया। यही इनके पुत्र महाभागवत राँकाजी हुए।  पण्ढरपुरमें ही वैशाख कृष्ण सप्तमी बुधवार संवत् 1351 वि० को कर्कलग्नमें श्रीहरिदेव ब्राह्मणके घर एक कन्याने जन्म लिया। इसी कन्याका विवाह समय आनेपर राँकाजीसे हो गया। राँकाजीकी इन्हीं पतिव्रता भक्तिमती पत्नीका नाम उनके प्रखर वैराग्यके कारण 'बाँका' हुआ। राँकाजीका भी 'राँका' नाम उनकी अत्यन्त कंगाली रंकताके कारण ही पड़ा था। राँकाजी रंक तो थे ही, फिर जगत्‌की दृष्टि उनकी ओर क्यों जाती। इस कंगालीको पति-पत्नी दोनों ने भगवान्‌की कृपाके रूपमें बड़े हर्षसे सिर चढ़ाया था; क्योंकि दयामय प्रभु अपने प्यारे भक्तोंको अनर्थो की जड़ धनसे दूर ही रखते हैं।  दोनों जंगलसे चुनकर रोज सूखी लकड़ियाँ...

श्रीनाथ जी के 'अष्ट सखा

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🦚 श्रीनाथ जी के 'अष्ट सखा' (अष्टछाप): नित्य गोलोक के ८ सखा, अष्टयाम सेवा और उनकी अमर वाणियाँ 🦚 ​जय श्री राधे! 'श्री धाम वृंदावन' पेज के सभी सुधीऔर रसिक भक्तों का आज की इस ज्ञानवर्धक शृंखला में हृदय से स्वागत है। जब भी ब्रज मण्डल में श्रीनाथ जी (साक्षात गोवर्धन नाथ) की 'अष्टयाम सेवा' का वर्णन होता है, तो आठ महान रसिक संतों का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। पुष्टिमार्ग में इन्हें 'अष्ट सखा' या 'अष्टछाप' कहा जाता है। आइए, गोलोक धाम के इन नित्य सखाओं के दिव्य चरित्र, उनकी महत्ता और उनके द्वारा रचे गए अद्भुत पदों का प्रामाणिक दर्शन करें: ​🌺 अष्ट सखाओं का आध्यात्मिक रहस्य: गोलोक के नित्य सखाओं का अवतार 🌺 ​'चौरासी वैष्णवन की वार्ता' और 'दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता' जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, ये आठों संत कोई साधारण कवि नहीं थे। नित्य निकुंज (गोलोक धाम) में श्री कृष्ण के जो ८ मुख्य सखा हैं (जो उनके साथ खेलते और गाते हैं), पुष्टिमार्गीय वार्ता परंपरा और रसिक आचार्यों की व्याख्याओं में इन अष्टछाप कवियों को श्रीकृष्ण के...