भगवान विष्णु का बृह्मा जी का विवादऔर भगवान विष्णु का सत्यनारायण कहलाना ?
भगवान विष्णु का बृह्मा जी का विवाद
और भगवान विष्णु का सत्यनारायण कहलाना ?
एक बार ब्रह्मा जी ने देखा कि मैं कमल के पुष्प के ऊपर बैठा हूं तो इस पुष्प का जन्म स्थान कहां है। तो उसकी डंडी पकड़कर नीचे आए तो उन्होंने पाया कि भगवान विष्णु के नाभि कमल से पुष्प की उत्पत्ति हुई है।
तब उन्हेंने विष्णु से कहा कि आप के नाभि कमल से मेरा जन्म हुआ है तो आपका जन्म किस से हुआ है आप के पिता कौन हैं।
तब भगवान विष्णु ने उत्तर दिया कि जिसने मुझे जल मैं एक बिन्दु रुप बुलबुले के रूप में दर्शन दिए वहीं मेरे पिता हैं। उनका नाम शिव है। इस बिंदु को विद्वतजन ज्योतिर्लिंग कहते हैं शिवलिंग कहते हैं।
आप जो कह रहे हैं उस पर मैं कैसे विश्वास करूं यदि मुझे विश्वास ही दिलाना है तो मुझे अपने पिता के दर्शन कराइए मुझे आपके पिता के दर्शन करने हैं।
विष्णु बोले मेरा पिता सर्वस्व हैं । वह कण-कण में विराजमान है । चलो मैं आपको उनके दर्शन करा देता हूं यह कहकर भगवान विष्णु ने सागर में बुलबुला उत्पन्न करने के लिए एक पर्वत को उठाया और उन्होंने सागर में उस पर्वत की सहायता से सागर मंथन किया। तो वहां एक खंम्बरूप ज्योतिर्लिंग उत्पन्न हुआ जो ऊपर आकाश में और नीचे पाताल में जा रहा था।
दोनों सोचने लगी है क्या है। तब उस ज्योतिर्लिंग से भविष्यवाणी हुई कि मैंने इस सागर में विष्णु को उत्पन्न किया और विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न करके ब्राह्म तुमको उत्पन्न किया । इस प्रकार मैं विष्णु का पिता और आपका पिता मह हूँ।
ब्रह्मा का के पांच मुख थे जिनमें से पांचवें मुख को विश्वास नहीं हुआ कि यह भविष्यवाणी सत्य है। उन्होंने उस ज्योतिर्लिंग को नीचे से ऊपर तक देखा। तो पाया की इसका ना इस तो इसका सिर है और नहीं पर फिर यह कैसे हमें जन्म दे सकता है।
पहले इसके सिर और पैर का पता किया जाए तभी इस बात को सत्य माना जाए। अब तुम यह बताओ कि तुम किसे खोजना चाहोगे पैरों को या मुख को।
तब ब्रह्मा ने विष्णु से कहा कहा था ठीक है तुम ऊपर की तरफ जाओ और इनका मुंह देखो विष्णु जी ने मना किया है कि मैं ऐसा पाप नहीं कर सकता कि मैं अपने जन्म देने वाले हैं के मुख को देखने जा इतनी सामर्थ्य मुझ में नहीं है मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ति की नहीं है अपने पिता के चरण देख कर उनका आशीर्वाद पाऊंगा । लेकिन जो वह आए तो उन्हें चरण नहीं मिले।
तो वह वापस लौट आए और ब्रह्मा जी के लौटने का इंतजार करने लगे हैं। ब्रह्मा जी मुख की खोज में और ऊपर और ऊपर और ऊपर जाते गए लेकिन उन्हें मुख नहीं दिखाई दिया। जब उन्हें मुख नहीं दिखाई दिया तो वहां उन्हें एक गाय दिखाई दी।
तब ब्रह्मा जी ने गाय को झूठ बोलने के लिए राजी कर लिया कि प्रत्येक घर से तुझे एक रोटी दिलवाऊंगा तु जिस घर जाएगी तुझे एक रोटी अवश्य मिलेगी। तुझे कोई दुत्कारेगा नहीं। एक रोटी के लिए गौ माता ने झूठ बोल ने के लिए तैयार हो गई। मात्र एक रोटी के लिए।
तो गौ माता ब्रह्मा जी से बोली हे ब्रह्मदेव मैं तो बोल दूंगी परंतु मेरी बात पर विश्वास कौन करेगा?
तभी उनकी निगाह केतकी के फूल पर पड़ी उन्होंने उसे तोड़ लिया और उससे बोले कि तुझे नीचे चल कर बोलना होगा कि मैंने सिर के दर्शन कर लिए है और यह गाय उसकी साक्षी है। इस पर वह वह फूल बोला कि मुझे इससे क्या लाभ होगा ?
तो ब्रह्मा जी ने कहा मैं तुझे सबसे खुशबूदार फूल तो बना दूंगा। हर तरफ सुगंध ही सुगंध फैलाएगा । तेरी सुगंध कभी कम नहीं होगी।
गाय और केतकी के फूल के साथ ब्रह्मा जी नीचे पहुंचे तो घमंड में विष्णु भगवान के पास गए। तब
वे विष्णु जी के पास गए और ब्रह्मा जी ने पूछा कि क्या तुम्हें शिव के चरण मिले?
तो भगवान विष्णु ने मना कर दिया नहीं। और आपको हमारे पिता के मुख के दर्शन हुए बताइए वह कैसा है?
ब्रह्मा जी से विष्णु ने पूछा तुम्हें सिर मिला तो ब्रह्मा जी ने कहा हां
तभी भविष्यवाणी हुई है कि ब्रह्मा जी झूठ बोल रहे हैं उन्हें सिर के दर्शन नहीं हुए हैं।
तो उन्होंने कहा कि तुम्हें विश्वास नहीं है तो इस गाय से पूछो मैं इसी साक्षी के लिए इसे लेकर आया हूं।
तब भगवान विष्णु ने गाय से पूछा कि तुमने भगवान शंकर का सिर देखा तो उसने भी हां कह दिया इस प्रकार गाय ने एक रोटी के चक्कर में झूठ बोल दिया।
एक बार फिर आकाशवाणी हुई गाय झूठ बोल रही है ।
तो ब्रह्मा जी पुणे बोल, तुम्हें विश्वास नहीं है तो मेरे पास एक और साक्षी है। इस केतकी के फूल से पूछो, तब भगवान विष्णु ने केतकी से पूछा कि हे केतकी क्या ब्रह्मा जी ने भगवान शंकर का सिर देखा है तो केतकी ने खुशबूदार बनने के चक्कर में झूठ बोल दिया।
तब शंकर जी ने प्रकट होकर कहा कि गौमाता तूने जगत की माता होकर झूठ बोला है। तेरे शरीर से पूरा विश्व पोषित होता है इसलिए तेरा पूरा शरीर पूजा जाएगा लेकिन तूने मुखसे झूठ बोला है इसलिए, तेरा मुख नहीं पूजा जाएगा। सब लोग सभी देवों की तीर्थ स्थलों की मंदिरों की परिक्रमा आगे से प्रारंभ करेंग। पर गौ माता तूने अपने मुंह से झूठ बोला है इसलिए तेरी परिक्रमा मुख से नहीं बल्कि तेरी पूछ से शुरू होकर तेरी पूंछ पर ही समाप्त हो गई।
संसार में किए जाने वाले सभी दान वस्त्र दान अन्न दान आगे से से करेंगे लेकिन गौमाता का दान अर्थात गोदान पीछे से तेरी पूछ पकड़ कर किया जाएगा। इसलिए आज भी गौ माता का दान गाय की पूंछ पकड़कर किया जाता हैं।
गौमाता को अपनी गलती का एहसास हो गया तो गौ माता ने भगवान शिव से क्षमा मांग ली और शिव ने क्षमा कर दिया।
फिर भगवान भोलेनाथ ने भगवान विष्णु के समक्ष केतकी के झूठ बोलने पर गुस्सा आ गया और वह बोले तुमने विष्णु और मेरे सामने झूठ बोला है इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू सारे देवों ऊपर चढ़ेगा लेकिन मेरे ऊपर कभी नहीं चढ़ेगा।
यदि भूल से भी जो तुझे मेरे ऊपर चढ़ेएया तो उसे सहस्रों गौ हत्या के पाप के बराबर पाप लगेगा।
तब भगवान भोलेनाथ बोले हे विष्णु तुमने मेरे समक्ष न होने पर भी सबके सामने सत्य बोला इसलिए आज से तुम्हारा नाम सत्यनारायण होगा। और सत्यनारायण के नाम से जो तुम्हारा कथा पूजन हवन आदि करेगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
परंतु ब्रह्मा के पांचवें मुख ने अभी भी शिव के लिए उल्टा सीधा बोलना जारी रखा। शिव ने ब्रह्मा जी के पांचवें मुख को बार-बार शांत रहने के लिए कहा लेकिन वह चुप नहीं हुआ।
तब गुस्से में आकर उन्होंने पैर के अंगूठे के नख से ब्रह्मा के पांचवें मुख को काट दिया। और शेर के जमीन में गिरते ही वह बड़ अर्थात वट के वृक्ष में बदल गया। इस प्रकार ब्रह्मा जी के के पांचवें सिर से बड़ अर्थात वट के वृक्ष का जन्म हुआ।
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